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सुविचार -७

चलने वाले पैरों में कितना फर्क होता है एक आगे तो एक पीछे लेकिन न तो आगे वाले को अभिमान होता है और न ही पीछे वाले का अपमान क्योंकि उन्हें पता होता है कि कुछ ही समय में यह स्थिति बदलने वाली है इसी को जीवन कहते हैं।



सुविचार -६

Why Did This Happen To Me ?
मेरे साथ ऐसा क्यों हुवा ?

जैसा कर्म वैसा फल

 यह कुदरत का नियम है , जो जैसा करेगा वैसा पायेगा।

हमारा आज वर्तमान जैसा भी है उसके जिम्मेदार सिर्फ हम है, क्योंकि वह बीते कल के किये कर्म का फल है और आज हम जैसा कर्म करेंगे वैसा हमारा भविष्य बनेगा।

सोचना , बोलना , सुनना, देखना यह सब कर्म में आता है।  इसलिए हमें अच्छा सोचना है, अच्छा बोलना है अच्छा करना है।

श्रेष्ठ कर्म का आधार धर्म है।

शांति, प्रेम , दया, करुणा, पवित्रता, आत्मिक भाव यही श्रेष्ठ धर्म है।

 परमात्मा कहतें :

"दुआ दो दुआ लो"

"सुख दो सुख लो।"




सुविचार - ५

भाग्यशाली वे नही होते जिन्हें,
सब कुछ अच्छा मिलता है
बल्कि वे होते हैं,
जिन्हें जो मिलता है,
उसे वो अच्छा बना लेते हैं |




सुविचार -४

ये दुनियां एक तालाब जैसी ही है, उसी तालाब में हँस मोती चुगता है और बगुला मछली... सिर्फ सोच-सोच का फर्क होता है... आप दुनियां रूपी तालाब से क्या चुनते हैं? ये आप पर ही निर्भर करता है। आपकी सोच ही आपको बड़ा बनाती है।



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